रेंत का भूत।

 

रेंत का भूत

शाम का वख्त है कुछ लोग अपने जानवरों को गांव में खेत से चरा कर वापस ला रहे हैं । मुंह अंधेरा हो गया है गांव के कुछ बुजुर्ग अलाव के पास बैठे आग सेक रहे हैं उनके साथ कुछ बच्चे भी हैं बुजुर्ग बच्चों को कहानियां सुना रहे हैं महिलाएं लकड़ी या सिर्फ लादे हुई गांव की ओर बढ़ रही है लोग अपने पशुओं को खूटे से बांध रहे हैं कुछ लोग जानवरों को गांव में ला रहे हैं चारों तरफ चहल-पहल मची हुई है शाम का वक्त है और लोग घर में भोजन पकाने की व्यवस्था कर रहे हैं कभी अलाव के पास बैठी बूढ़ी माई खड़ी हो जाती है और जोर से चिल्लाकर बोलती सुनो सभी आज अंधेरी रात है और गांव के बाहर जो पीपल पर भूत रहता है वह रात में शिकार करेगा इसलिए जल्दी जल्दी भोजन बना लो और रात होने से पहले ही सब लोग खा पीकर सो जाओ पास में बैठे बाबा जिनका नाम शंकर है वो भी कहते हैं ठीक है ठीक है जल्दी करो रात होने वाली है लेकिन हमारा ओझा कहां गया उसे भी बुलाओ रात होने वाली है पूजा-पाठ का इन्तजाम करें जिससे इस भूतसे जल्दी छुटकारा मिल जाए जाने कहां समाधि लगाए बैठा है।

हो ना हो यह पीपल वाला भूत हमारे गांव का शरारती लड़का सरोज यही है जो मरने के बाद पूरे गांव को परेशान कर रहा है और बच्चों को और जवान लोगों को मार रहा है मैं तो यही कहूंगा किसी तरह से छुटकारा मिल जाए तो हम सब मुक्ति पा जाए दिन तक दिन तक तो ठीक है रात का रात में सोना दुश्वार हो गया है हम सब क्या करें हमारी कोई गलती नहीं है फिर भी हमें परेशान किया जा रहा है भगवान भी हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है हम क्या करें हम गांव वाले मुसीबत में है और हमारा गांव के ओझा आज पता नहीं कहां मर गया है ओझा से मैंने कल ही कहा था कि अमावस की रात है पूजा का इंतजाम तुमको करना है रात भर तुम्हारी पूजा चलेगी लेकिन ठरकी किसम का आदमी पता नहीं कहां है लगता है शराब पीकर कहीं पढ़ा होगा चलो ठीक है आने दो बताता हूं तब ही सड़क पर शंकर बाबा को ओझा आता हुआ दिखता है।


पढ़ते रहिए......


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